मेक इन इंडिया अभियान को प्रमोट करने के लिए इस ट्रेन को चेन्नै स्थित इंट्रीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है। इसे ट्रेन-18 का कोड नाम दिया गया है। यह सेमी हाई-स्पीड ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। इससे पहले इस ट्रेन के जुलाई महीने में ही चलने की उम्मीद
ट्रेन के संचालन में देरी को लेकर सवाल पूछने पर चेन्नै स्थित इंट्रीग्रल कोच फैक्ट्री के जनरल मैनेजर सुधांशु मणि ने कहा कि यह कोई देरी नहीं है बल्कि अनुमानित समय में एक तरह से बदलाव जैसा है। मणि ने कहा, 'कोई देरी नहीं है। दुनिया में कहीं भी ऐसी ट्रेन को तैयार करने में 2 से 3 साल तक का वक्त लगता है, लेकिन हमने रेकॉर्ड 16 महीनों में ट्रेन को तैयार कर दिया। पहले इस ट्रेन को चलाने का समय हमने जुलाई तय किया था, लेकिन अब उम्मीद है कि सितंबर तक इसे पटरी पर उतार दिया जाएगा।'

ट्रेन 18 की खासियत यह है कि इसमें इंजन की जरूरत नहीं है और यह इलेक्ट्रिक लाइन पर मेट्रो की तरह खुद ही आगे बढ़ सकेगी। इस ट्रेन को शताब्दी एक्सप्रेस समेत मौजूदा इंटरसिटी एक्सप्रेस की जगह चलाया जाएगा। आईसीएफ की ओर से ऐसी 6 ट्रेनें तैयार की जाएंगी, इनमें से दो ट्रेनों में स्लीपर कोच भी होंगे।