नई दिल्ली
बिहार में 12 जुलाई को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के एनडीए मुलाकात से ठीक पहले सहयोगी दलों ने अपने तेवर सख्त करने शुरू कर दिये हैं। जेडीयू के बाद एलजेपी नेता चिराग पासवान ने भी बीजेपी के लिए चिंता खड़ा करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ मिलकर काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में चिराग ने कहा कि सियासत में सबकुछ मुमकिन है और भविष्य में दोनों युवा नेता साथ मिलकर काम करें तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
सीट पाने का दबाव या कुनबे में दरार?सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान का ताजा बयान हो या नीतीश कुमार के सख्त तेवर, यह आम चुनाव से पहले बिहार की 40 लोकसभा सीट में अधिकतम सीट का हिस्सा लेने के तहत दबाव का हिस्सा भी हो सकता है। जेडीयू ने पहले ही संकेत दे दिया कि बिहार में वह बीजेपी के मुकाबले बड़ी पार्टनर है। मतलब पार्टी बीजेपी से अधिक नहीं तो कम से कम बराबर सीट की अपेक्षा कर रही है। वहीं रामविलास पासवान की पार्टी भी जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद उपजे हालात में अपनी सीट बरकरार रखने के लिए दबाव बनाए रखता चाहती है।
राज्य में सीटों के समझौते को को लेकर 12 जुलाई को अमित शाह बिहार में सभी सहयोगी दलों के नेता से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के अनुसार बीजेपी के रेडार में पप्पू यादव की पार्टी भी है। अगर पप्पू यादव भी एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो सीटों का बंटवारा और कठिन हो जाएगा। राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा भी एनडीए का हिस्सा हैं। हालांकि उनकी पार्टी में दो भाग हो गया है और दूसरा हिस्सा बीजेपी में शामिल हो सकता है। सूत्रों के अनुसार 12 जुलाई को अमित शाह के साथ मीटिंग के बाद ही राज्य की सियासत की तस्वीर साफ हो पाएगी। उसी मीटिंग पर आरजेडी और कांग्रेस की भी नजदीकी नजर है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राज्य के घटनाक्रम पर उसकी नजर है और सब कुछ साफ होने के बाद ही पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी।