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16 February 2019

पुलवामा हमले के खिलाफ बदला लेने में बहुत बंधे हैं भारत के हाथ

पुलवामा में आतंकियों ने आईईडी धमाका किया था
20 साल में कभी पाकिस्तान के साथ नहीं थे इतने खराब रिश्ते
पुलवामा में आतंकी हमले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकियों को गंभीर चेतावनी दे दी है। करारा बदला लेने और सुरक्षा बलों को खुली छूट देने की घोषणा कर दी है। देश बहुत गुस्से में हैं। सभी राजनीतिक दल राष्ट्रीय एकता, अखंडता के मुद्दे पर सरकार के साथ हैं, लेकिन कूटनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सख्त कार्रवाई के लिए भारत के हाथ बहुत बंधे हैं। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह को भी कोई सही विकल्प नहीं सूझ रहा है। पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर को भी लग रहा है कि समय बहुत कठिन है। सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल भी इसे बहुत आसान नहीं मान रहे हैं। इन सबके बावजूद सबका मानना है कि सही अनुपात में, बेहद सख्त तरीके से पुलवामा में आतंकी हमले का बदला लिया जाना चाहिए।

क्या है मुश्किल

1. अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार विस्फोट भरी कार को बस से ओवरटेक करके टकराने वाला आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद डार कश्मीर का भारतीय नागरिक है। जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी ली है। आतंकी ने भारतीय क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बल के काफिले पर हमारे देश की कार में विस्फोटक ले जाकर हमला किया है। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के अनुसार यह हमारे खुफिया और सुरक्षा तंत्र का नतीजा है। पाकिस्तान इसी बिना पर इसे कश्मीर के लोगों की करतूत बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
 
2. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का कहना है कि पिछले 20 साल में भारत पाकिस्तान के रिश्ते इतने खराब कभी नहीं रहे, जितना चार-पांच साल में हैं। ट्रैक-टू-डिप्लोमेसी, बैक चैनल डिप्लोमेसी और दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के स्तर की कूटनीति बहुत प्रभावी नहीं है। दोनों देशों के शीर्ष राजनीतिक स्तर पर बहुत ही सीमित संवाद है। इसके चलते पाकिस्तान के ऊपर भारत का आतंकवाद को रोकने तथा कार्रवाई का दबाव बेअसर हो सकता है।

3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलवामा हमला, पाकिस्तान का आतंकवाद और इसकी शिकायत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाने में संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। ऐसा न होने पर अमेरिका, रूस, ब्रिटेन समेत दुनिया के देश जम्मू-कश्मीर के मामले में दखल बढ़ा देंगे। इतना ही नहीं भारत और पाकिस्तान के बीच में बहुत तनाव बढऩे पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल का खतरा रहेगा। इसे पाकिस्तान को चीन से मिलने वाला समर्थन और पेंचीदा बना देता है।

4. सेना या सुरक्षा बल के पास सर्जिकल स्ट्राइक, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का ही विकल्प है। इसके लिए नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षा बलों द्वारा 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पार करना आसान नहीं है। पाकिस्तान के सुरक्षा बलों से हमले का बदला लेने की स्थिति में दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच इस तरह के तनाव बढ़ेंगे और हालात तनाव पूर्ण होते जाएंगे। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार इसका समाधान जंग या जंग से हालात नहीं हैं।

नटवर सिंह और सलमान हैदर दोनों इस तरह के जटिल हालात से सहमत हैं। दोनों कूटनीति के जानकारों का मानना है कि चुनौती आसान नहीं है। इसके पीछे की एक वजह दोनों देशों का परिमाणु हथियारों से संपन्न होना है।  

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