महाराष्ट्र में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान देश के रक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि आने वाले समय में यह मिसाइल कॉम्प्लेक्स केवल उत्पादन इकाई बनकर नहीं रहेगा, बल्कि यह एक “रिसर्च-ओरिएंटेड हब” के रूप में विकसित होगा, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगा।
रक्षा मंत्री ने विशेष रूप से यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम (Universal Rocket Launching System) के लिए बनाए जा रहे मिसाइल कॉम्प्लेक्स को भारत की भविष्य की युद्ध रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक रॉकेट प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी और भारत की स्ट्राइक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। उन्होंने इसे “रणनीतिक गेम-चेंजर” बताते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में तेज, सटीक और दूरगामी हमले की क्षमता किसी भी राष्ट्र की शक्ति का आधार होती है और यह परियोजना उसी दिशा में देश को नई ताकत प्रदान करेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के विजन के तहत भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पहले जहां रक्षा उपकरणों और हथियारों के लिए भारत को विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब देश स्वदेशी तकनीक के बल पर मिसाइल, रॉकेट सिस्टम और आधुनिक हथियार प्रणालियों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कॉम्प्लेक्स भारत को रक्षा उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने इस परियोजना के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह मिसाइल कॉम्प्लेक्स केवल हाई-टेक उद्योगों को ही नहीं बढ़ावा देगा, बल्कि MSMEs, लघु उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़े अवसर पैदा करेगा। गोला-बारूद, मिसाइल, रॉकेट सिस्टम और सैटेलाइट कंपोनेंट्स के निर्माण में बड़ी संख्या में सहायक इकाइयों, सप्लायर्स और वेंडर्स की भागीदारी होगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे तथा उन्हें आधुनिक तकनीकी कौशल प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भी केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” अभियान ने देश की रक्षा तैयारियों को नई दिशा दी है। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय सैनिकों की अद्वितीय वीरता और देश की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा इकोसिस्टम अब तेजी से बदल रहा है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की समान भागीदारी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की सक्रिय भूमिका से न केवल तकनीकी विकास को गति मिली है, बल्कि भारतीय सेनाओं को भी लगातार आधुनिक और उन्नत उपकरण उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी सामरिक शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में भी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। MSMEs द्वारा विकसित रक्षा उत्पादों और तकनीकी क्षमताओं की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के साथ संवाद भी आयोजित किया गया, जिसमें भविष्य की रक्षा परियोजनाओं, स्वदेशी तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ General Anil Chauhan, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री Uday Samant, जल संसाधन मंत्री Radhakrishna Vikhe Patil, रक्षा उत्पादन सचिव Sanjeev Kumar तथा DRDO प्रमुख Samir V Kamat सहित अनेक वरिष्ठ सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकारी, रणनीतिक साझेदार और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजनाएं भारत को केवल सैन्य दृष्टि से ही मजबूत नहीं करेंगी, बल्कि देश को रक्षा निर्माण और तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी सहायक सिद्ध होंगी। आने वाले वर्षों में यह मिसाइल कॉम्प्लेक्स भारत की सामरिक शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास—तीनों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है।
