हर साल महिला दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। मेरा मानना है कि हर दिन महिला का है इसलिए हर दिन ही महिला दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। अगर किसी भी देश को शक्तिशाली होना है तो पहले समाज, फिर हर घर की महिला को सशक्त करना होगा और पिछले कुछ वर्षों से आप भी अनुभव कर रहे होगें, कि महिला सशक्त हो रही है । हर तरह हर रूप में इसे मनाया जा रहा है। सही मायने में इस बार के महिला दिवस को पुलवामा के शहीदों की पत्नियों, माताओं, बहनों और बेटियों को समर्पित करता हूं। जिन्हें अपने जीवन के अगले वर्षों का बहुत बहादुरी से सामना करना है। आज हमारे देश की लोकसभा स्पीकर, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, समाज कल्याण मंत्री, कपड़ा मंत्री और कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर महिलाएं विराजमान हैं। बहुत ही अच्छा लगता है जब एक महिला रक्षा मंत्री सभी रक्षा अधिकारियों की मीटिंग लेती हैं। गांवों की सरपंच महिलाएं हैं। आज ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के अंतर्गत महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। काफी हद तक गांव शौचालययुक्त हो चुके हैं। लकड़ी के धुएं से मुक्त हो चुके हैं। कई घरों की महिलाओं के गैस के चूल्हे के सपने पूरे हो चुके हैं। इन सबके बीच एक पक्ष गर देखा जाय तो वो कफी भयावह लगता है। जिस तरह से महिलाओं का समाज में दिये योगदान से विकास में लगातार गति मिल रही है। वही महिला समाज को मीटू, कास्टिंग काउच, जैसी समस्याओं में खुद को आगे कर समाज से अनाचार को खत्म करने के लिए (अपना सहयोग देना चाहिए ) आगे आना होगा। साथ ही कुछ महिलाएं इस का गलत उपयोग कर पुरुष वर्ग का समाज के कटघरे में खड़ा कर देती है। मेरा आज की युवा, समृद्ध महिलाओं से एक निवेदन है। आप समाज की आधी आबादी है। आप समाज के हर पहलु पर अपनी सह भागिता सुनिश्चित कर कुरीतियो से दुर करने में सहयोग करें।
(नारी देश के सम्मान में मेरा अपना विचार)
