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23 March 2018

चूहा मारने वाली संस्था का पता भी बोगस!

the rat-killer organization is also bogus!
मुंबई 
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने गुरुवार को विधानसभा में बीजेपी सरकार के राज में मंत्रालय में हुए जिस चूहा घोटाला का पर्दाफाश किया था, उसमें कई और सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही हैं। शुक्रवार को पता चला है कि मंत्रालय में चूहे मारने का ठेका जिस संस्था को दिया गया था, उसका पता ही फर्जी है।
मंत्रालय में चूहा मारने का ठेका 'विनायक मजूर सहकारी संस्था' को दिया गया था। ठेके के सरकारी दस्तावेज में इस संस्था का पता 118, सी विंग, सूर्यकुंड हाउसिंग सोसायटी लि., गनपाउडर रोड, मझगांव, मुंबई दिया गया है। शुक्रवार को जब इस पते की खोजबीन की गई तो पता चला कि इस पते पर 'विनायक मजूर सहकारी संस्था' का कोई कार्यालय नहीं है। 118 नंबर के इस प्लैट में पिछले 45 साल से शेंडगे परिवार रह रहा है और परिवार के मुखिया कैलाश शेंडगे सरकारी कर्मचारी हैं। वह मझगांव डॉक में नौकरी करते हैं। 
चूहे नहीं, चूहे मारने की गोली 
बीजेपी सरकार के राज में सरकार की नाक के नीच मंत्रालय में हुए इस चूहा घोटाले में दूसरा बड़ा खुलासा सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से हुआ है। विभाग की तरफ से मीडिया को बताया गया है कि मंत्रालय में 3 लाख चूहे नहीं मारे गए, बल्कि चूहे मारने की गोलियों की आपूर्ति के लिए 4 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, बीजेपी सरकार ने मंत्रालय और मंत्रालय से लगी एनेक्स इमारत में चूहे मारने के लिए 3 मई 2016 को दो निविदाएं 'विनायक मजूर सहकारी संस्था' के नाम मंजूर की थीं। इन निविदाओं के तहत चूहे मारने की 3,19,400 गोलियों की आपूर्ति की गई थी। इस एक गोली की कीमत डेढ़ रुपये है। इसके लिए सरकार ने 4 लाख, 79 हजार, 100 रुपये खर्च किए हैं। साथ ही विभाग ने यह भी दावा किया है कि एकनाथ खडसे ने जिस आरटीआई से यह जानकारी हासिल की है, उसमें भी यही जानकारी दी गई है। 

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या खडसे के आरोप गलत हैं। उन्होंने विधानसभा में गलत जानकारी दी है? अगर खडसे गलत हैं, तो सरकार उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी, यह देखने वाली बात होगी। 

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