आज दिनांक 13 सितंबर 2022 को गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली ( Gandhi Peace Foundation, New Delhi) में समायोजित राष्ट्रीय सद्भावना सम्मेलन में विश्वशांति और सद्भावना पर अपने विचार रखते हुए मंत्र महर्षि श्री योगभूषण जी महाराज ने कहा कि किसी भी धर्म में हिंसा और नफरत का समर्थन नही किया है, जैन धर्म भी अहिंसा को परम धर्म के रूप में स्वीकार करता है और जियो और जीने दो का संदेश सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित करता है। उन्होंने भारतीयता पर जोर देते हुए कहा कि हम हिंदू, मुस्लिम, जैन, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध आदि सब बाद में हैं, सबसे पहले भारत में पैदा होने वाले सच्चे भारतीय हैं और भारतीय होने के नाते इस मातृ भूमि की सुरक्षा और इसके गौरव को बनाए रखने के लिए हम सबको यथासंभव पुरुषार्थ करना ही चाहिए । नफरत और हिंसा फैलाने वाले कभी धार्मिक लोग नही हो सकते, सभी धर्म प्रेम, इंसानियत और सद्भावना का ही पाठ पढ़ाते हैं । जो लोग धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत फैला रहे हैं, ऐसे लोगों को तत्काल नामांकित किया जाए और धार्मिक तथा सामाजिक रूप से सार्वजनिक स्तर पर बहिष्कृत किया जाना चाहिए । सभी धर्म गुरुओं का भी यह नैतिक कर्तव्य है कि वो अपने अनुयायियों को धर्म का सच्चा पाठ पढ़ाते हुए आपसी भाईचारा और समन्वय का संदेश प्रसारित करें । आज देश में जो माहौल बन रहा है, ऐसे माहौल में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन प्रासंगिक भी है और आवश्यक भी ।
सम्मेलन सभा में सभी धर्मो के गणमान्य संत एवं अनुयाई उपस्थित रहे।
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