यह बात आपको चौंका सकती है, मगर एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि 30 साल की उम्र से आगे बढ़ते ही पैसों के पंख लग जाते हैं। यह सर्वेक्षण क्लियरस्कोर संस्थान ने कराया है। इसमें कहा गया है कि युवावस्था की दहलीज से निकलकर जब हम उम्र के इस दौर में कदम रखते हैं तो जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं।
सर्वे में शामिल लोगों का मत था कि 31वां साल जीवन में आगे बढ़ने का होता है। इस उम्र में पहुंच कर बहुत से लोग शादी के बारे में या परिवार को बढ़ाने के बारे में सोचने लगते हैं। ऐसे में जाहिर सी बात है कि उनका निवेश अलग तरह से होने लगता है और दूसरे तरह के खर्चे भी बढ़ जाते हैं।
उम्र के इस पड़ाव पर ज्यादातर लोग भविष्य की योजनाएं बनाने में लग जाते हैं और अपने खर्चों की निगरानी शुरू कर देते हैं। यह ऐसा समय होता है, जब लोग अपनी बचत सिर्फ मौज-मस्ती के लिए खर्च नहीं करते हैं। सर्वे में शामिल 25 फीसदी लोगों का कहना था कि वो इस समय अपना घर खरीदने के बारे में सोच रहे थे। इसी तरह 20 फीसदी लोग अपना परिवार बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे।
कुछ ऐसे लोग भी थे जो शादी और परिवार से निपट चुके थे, तो वे अपने परिजनों के साथ अच्छी छुट्टियों पर जाने की योजना बना रहे थे। अच्छी बात यह होती है कि इस उम्र तक माता-पिता साथ मिलता है, जिससे वित्तीय दबाव कुछ हद तक कम हो जाता है। सर्वे में शामिल 33 फीसदी लोगों ने यही जवाब दिया।
सर्वे में शामिल लोगों का मत था कि 31वां साल जीवन में आगे बढ़ने का होता है। इस उम्र में पहुंच कर बहुत से लोग शादी के बारे में या परिवार को बढ़ाने के बारे में सोचने लगते हैं। ऐसे में जाहिर सी बात है कि उनका निवेश अलग तरह से होने लगता है और दूसरे तरह के खर्चे भी बढ़ जाते हैं।
उम्र के इस पड़ाव पर ज्यादातर लोग भविष्य की योजनाएं बनाने में लग जाते हैं और अपने खर्चों की निगरानी शुरू कर देते हैं। यह ऐसा समय होता है, जब लोग अपनी बचत सिर्फ मौज-मस्ती के लिए खर्च नहीं करते हैं। सर्वे में शामिल 25 फीसदी लोगों का कहना था कि वो इस समय अपना घर खरीदने के बारे में सोच रहे थे। इसी तरह 20 फीसदी लोग अपना परिवार बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे।
कुछ ऐसे लोग भी थे जो शादी और परिवार से निपट चुके थे, तो वे अपने परिजनों के साथ अच्छी छुट्टियों पर जाने की योजना बना रहे थे। अच्छी बात यह होती है कि इस उम्र तक माता-पिता साथ मिलता है, जिससे वित्तीय दबाव कुछ हद तक कम हो जाता है। सर्वे में शामिल 33 फीसदी लोगों ने यही जवाब दिया।