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22 March 2018

शहीद दिवस: भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को दी गई थी फांसी, यहां पढ़ें उनके 5 विचार

Bhagat Singh‬, ‪Shivaram Rajguru‬, ‪Sukhdev Thapar‬, ‪Martyrs' Day
23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटका दिया। भगत सिंह ने देश की आज़ादी के लिए 23 साल की उम्र में हंसते-हंसते अपने जीवन का बलिदान दे दिया। तभी से हर साल 23 मार्च को इन तीन शहीदों की याद में शहीदी दिवस मनाया जाता है।
शहीदे आजम भगत सिंह का जन्म पाकिस्तान के एक गांव लायलपुर में 28 सितम्बर 1907 में हुआ था। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था। 12 साल की उम्र में आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। आज उनकी 87वीं पुण्यतिथि पर हम आपके लिए उनके 5 विचार: 
1. व्‍यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं।
2. निष्‍ठुर आलोचना और स्‍वतंत्र विचार, ये दोनों क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।
3. राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है. मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में आजाद है।
4.प्रेमी पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं और देशभक्‍तों को अक्‍सर लोग पागल कहते हैं।
5. जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।

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