*चातुर्मास की जानकारी*
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू हो जाता है। इस बार यह तिथि 10 जुलाई दिन रविवार को है। आषाढ़ मास की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से 4 महीने तक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। मान्यता है कि चातुर्मास में तप, साधना और उपवास रखने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है। चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल की एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तक चलता है। चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से शुरू होती है और अंत देवोत्थान एकादशी पर होता है। 4 महीने की अवधि में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास लगते हैं।
🔅 *चातुर्मास के दौरान क्या वर्जित है?*
चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। क्योंकि ये सभी कार्य शुभ मुहूर्त और तिथि पर किए जाते हैं। लेकिन भगवान विष्णु के शयन मुद्रा में जाने के कारण कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। चातुर्मास में तप, साधना और उपवास रखने से बहुत जल्दी लाभ मिलता है।
🔅 *चातुर्मास में क्या करना चाहिए*
1- चातुर्मास में व्रत, साधना, जप-तप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान, दान, पत्तल पर भोजन करना विशेष फलदायक माना गया है। इस मास में धार्मिक कार्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है और भगवान नारायण की कृपा हमेशा बनी रहती है।
🔅- चातुर्मास के दौरान कुछ लोग चार माह तक एक समय ही भोजन करते हैं और राजसिक व तामसिक भोजन का त्याग कर देते हैं। इस समय ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, ऐसा करने से शक्ति का संचय होता है।
🔅- चातुर्मास के समय भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी, भगवान शिव और माता पार्वती, श्रीकृष्ण, राधा और रुक्मिणी जी, पितृदेव, भगवान गणेश की पूजा सुबह-शाम अवश्य करनी चाहिए। साथ ही इस समय साधु-संतों के साथ सत्संग करना लाभदायक होता है।
🔅- चातुर्मास के दौरान दान करना विशेष फलदायी माना गया है। इन 4 महीनों में दान करने से आयु, रक्षा, स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही इस अवधि में पितरों के निमित्त पिंडदान या तर्पण करने के लिए उत्तम रहता है। इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इस माह में की गई पूजा व साधना जल्द ही फलीभूत होती है।
🙏।।जय श्री राम।।🙏
नर्मदे हर...🌹
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