नई दिल्ली: तालिबान की ताकत अफगानिस्तान तक ही सीमित नहीं है। फिलहाल पूरी दुनिया आतंकियों को दहशत में है। उनकी हिरासत में फंसे विभिन्न देशों के नागरिकों के बचाव को लेकर राज्य चिंतित है। भारत कोई अपवाद नहीं है। काबुल से भारतीयों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन देवी शक्ति' जारी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विस्तार से चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक की। ऐसी विकट स्थिति पर चर्चा में लगभग सभी दलों ने हिस्सा लिया है।
विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान की समग्र स्थिति पर एक से अधिक बार चर्चा की है। अबकी बारी थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की। यही सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य था। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक बुलाई थी। इसी तरह तृणमूल (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय और सुखेंदुशेखर रॉय भी बैठक में शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी और गुलाम नबी आजाद। इसके अलावा सीपीएम, भाकपा, सपा और बसपा के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और काबुल में भारतीय राजदूत रुद्रेंद्र टंडन जयशंकर के साथ बातचीत के मौके पर मौजूद थे।
तालिबान ने दोहा शांति वार्ता में अपना वादा पूरा नहीं किया। इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्री ने चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया। यही सबसे ज्यादा चिंता की बात होती जा रही है। इसके अलावा, ऑपरेशन देवी शक्ति के लिए तालिबान की धमकी के बारे में कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। लेकिन इसके बावजूद फंसे हुए हर भारतीय को सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि पहले ही 15,000 भारतीयों ने विदेश मंत्रालय के हेल्प डेस्क से जल्दी घर लौटने के लिए संपर्क किया है।
सभी दलों के सांसदों ने अफगानिस्तान से भारतीयों को बचाने के लिए विदेश मंत्रालय को धन्यवाद दिया। यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है, खासकर जब से विपक्ष ने सरकार की प्रशंसा की है। भारत अफगानिस्तान में तालिबान के साथ 'रुको और देखो' की नीति पर चल रहा है। सर्वदलीय बैठक में जयशंकर ने एक बार फिर स्पष्ट किया है।
