एमबीबीएस की कॉपियां बदलने का खेल वर्ष 2014 से चल रहा था। चार सत्र की परीक्षाओं के दौरान अब तक कई सौ कॉपियां बदली गईं। एसटीएफ का दावा है कि इस दौरान तकरीबन 600 से ज्यादा छात्र फर्जी ढंग से पास होकर डॉक्टर बन गए। इस खेल से कौन-कौन छात्र पासआउट हुए, वह अब कहां-कहां डॉक्टर बने बैठे हैं, उन सब पर जांच बैठा दी गई है।

एसटीएफ आईजी अमिताभ यश के मुताबिक, बिजनौर के शाहपुर का कविराज चारों अभियुक्तों का मुख्य सरगना है। वह वर्ष 2014 से उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवा रहा है। हर साल यह गैंग 150 से 200 छात्रों की विभिन्न पेपरों की कॉपियों को बदलवा देता है। एक कॉपी बदलवाने के बदले एक छात्र से डेढ़ लाख रुपये तक वसूले जाते हैं। इस प्रकार यह गैंग अब तक चार करोड़ रुपये से ज्यादा के वारे-न्यारे कर चुका है। गैंग ने यह भी कुबूला है कि सीसीएस यूनिवर्सिटी से जुड़े डिग्री कॉलेजों में विभिन्न परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं छात्रों से 10 से 20 हजार रुपये लेकर बदलवाई गई हैं। आईजी ने बताया कि एमबीबीएस के जो छात्र पढ़ाई में कमजोर होते थे, वह पास होने के लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार हो जाते थे। आईजी के मुताबिक, वर्ष 2014, 2015, 2016 और 2017 में छह सौ से ज्यादा गैर मेधावी छात्र इस गोरखधंधे के जरिये पासआउट होकर डॉक्टर भी बन चुके हैं। पता लगाया जा रहा है कि किन कॉलेजों में किस-किस छात्र की कॉपियां बदली गईं। इसके बाद इन पासआउट छात्रों को भी साजिश का आरोपी बनाया जाएगा।