
भाजपा सरकार ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम बदल कर डा. भीमराव रामजी आंबेडकर क्या किया, इसे लेकर सियासत तेज हो चली है। विपक्षी दल इसे लेकर भाजपा सरकार पर दलित सियासत का दांव लगाने के आरोप लगाएं हैं, वहीं आंबेडकर महासभा ने इसका स्वागत किया है।
असल में आंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के सुझाव पर यह नाम बदला गया। सबसे तीखी प्रतिक्रिया बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से आयी है। असल में बसपा को लगता है कि नाम में रामजी शब्द जुड़ने से भाजपा इसे भुनाकर सियासी लाभ लेगी। पर, भाजपा की ओर से कहा गया है कि नाम में बदलाव में कुछ भी नया नहीं है।
असल में केंद्र सरकार ने वर्ष 1991 में आंबेडकर पर जो डाक टिकट जारी किया है, उसमें डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर और अंग्रेजी में बीआर अम्बेडकर लिखा है। सरकार का दावा है कि उसने नाम सही किया है। कोई सियायी चाल नहीं चली।
मुख्यमंत्री ने वैसे भी आंबेडकर के सम्मान में कई फैसले लिए हैं। मसलन, सरकार ने हाल ही में डा. भीम राव अम्बेडकर का नाम बदल कर भीमराव रामजी आंबेडकर करने व इसे सभी अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश दिया है। पिछले दिनों सरकार ने आंबेडकर का चित्र सभी कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लगाने का आदेश अलग से दिया है। यही नहीं आगामी 14 अप्रैल आंबेडकर जयंती से दलित बाहुल्य क्षेत्रों में मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का अभियान चलाया जाएगा। इन सबको विरोधी दल राजनीतिक नजरिए से देखते हैं।
आंबेडकर महासभा ने स्वागत किया
भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहेब डा.भीमराव आंबेडकर महासभा ने बाबा साहब के नाम को सही ढंग से लिखने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश को सही और स्वागत योग्य बताया है। महासभा के अध्यक्ष डा.लालजी प्रसाद निर्मल ने गुरुवार को जारी बयान में बाबा साहब डा.आंबेडकर नाम पर विवाद को अनुचित बताया।
डा.निर्मल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के नाम में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता क्योंकि व्यक्तिवाचक संज्ञा का रूपांतरण नहीं होता। उन्होंने कहा कि बीती छह दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री ने डा.आंबेडकर के चित्र सभी सरकारी कार्यालयों में लगाने के आदेश दिए थे, जिसके अनुपालन में प्रमुख सचिव सूचना ने 22 दिसम्बर 2017 को आदेश जारी किए थे उसमें भी भीमराव रामजी आंबेडकर का उल्लेख था जो पूरी तरह सही है। आंबेडकर महासभा का मानना है कि लेखन में, पाठयक्रमों में डा. आंबेडकर का नाम भीमराव रामजी आंबेडकर ही लिखा जाना उचित रहेगा।
डा.निर्मल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के नाम में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता क्योंकि व्यक्तिवाचक संज्ञा का रूपांतरण नहीं होता। उन्होंने कहा कि बीती छह दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री ने डा.आंबेडकर के चित्र सभी सरकारी कार्यालयों में लगाने के आदेश दिए थे, जिसके अनुपालन में प्रमुख सचिव सूचना ने 22 दिसम्बर 2017 को आदेश जारी किए थे उसमें भी भीमराव रामजी आंबेडकर का उल्लेख था जो पूरी तरह सही है। आंबेडकर महासभा का मानना है कि लेखन में, पाठयक्रमों में डा. आंबेडकर का नाम भीमराव रामजी आंबेडकर ही लिखा जाना उचित रहेगा।