
राज्यसभा चुनाव में कांटे की टक्कर में भाजपा ने अपना दमखम दिखाते हुये नौ सीटे जीत लीं। सपा अपनी एक सीट पर जया बच्चन को जिताने में तो कामयाब रही, लेकिन सहयोगी बसपा के प्रत्याशी भीमराव अम्बेडकर को नहीं जिता पाई। चुनाव में भाजपा की चाक चौबंद रणनीति सपा, बसपा व कांग्रेस गठजोड़ की तैयारियों पर भारी पड़ी। इस तरह भाजपा के नौवें प्रत्याशी अनिल अग्रवाल चुनाव जीत गये। चुनाव में जहां दो वोट अवैध हुए वहीं विपक्षी दलों के आरोपों के कारण मतगणना कुछ देर स्थगित रही। आइए आपको इस चुनाव के शुरू से अंत के परिदृश्य से रूबरू कराते हैं...
भाजपा : शह
- भाजपा ने अपने विधायकों को बांधे रखने के लिए उन पर पैनी निगाह रखी और आठों प्रत्याशियों को 39 -39 वोट आवंटित किये ।
- वोट गलत न पड़ जाए इसलिए सभी विधायकों को वोट डालने का पूर्वाभ्यास कराया गया।
- निर्दलीय वोटों के साथ साथ दूसरे दलों में भी कामयाबी से सेंधमारी कराई गई।
- वोट गलत न पड़ जाए इसलिए सभी विधायकों को वोट डालने का पूर्वाभ्यास कराया गया।
- निर्दलीय वोटों के साथ साथ दूसरे दलों में भी कामयाबी से सेंधमारी कराई गई।
बसपा : मात
- जेल में बंद मुख्तार अंसारी को वोट देने की अनुमति के मामले में अदालती पैरवी में देरी के चलते एक वोट बेजा गंवाना पड़ा।
- अतिरिक्त वोटों का इंतजाम बसपा ने स्वयं न कर सपा पर छोड़ा। सपा के साथ खुद अतिरिक्त वोटों का इंतजाम किया होता तो बदल सकता था परिणाम।
- बसपा अपना घर बचाए रखने में भी नाकाम साबित हुई। भाजपा का नौवां प्रत्याशी आने के बाद से ही तोड़फोड़ की जताई जा रही थी आशंकाएं।
- अतिरिक्त वोटों का इंतजाम बसपा ने स्वयं न कर सपा पर छोड़ा। सपा के साथ खुद अतिरिक्त वोटों का इंतजाम किया होता तो बदल सकता था परिणाम।
- बसपा अपना घर बचाए रखने में भी नाकाम साबित हुई। भाजपा का नौवां प्रत्याशी आने के बाद से ही तोड़फोड़ की जताई जा रही थी आशंकाएं।
सपा : दांव
- सपा जरूरत के आधार पर बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर के लिए जरूरी वोटों का इंतजाम नहीं कर पाई।
- निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया व विनोद सरोज सपा पाले में तो दिखे, लेकिन वोट नहीं हो सका ट्रांसफर।
- सपा अपना घर संभाल पाने में भी नाकाम साबित हुई। वजह मतदान से ठीक पहले नितिन अग्रवाल भाजपाई हो गए।
- निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया व विनोद सरोज सपा पाले में तो दिखे, लेकिन वोट नहीं हो सका ट्रांसफर।
- सपा अपना घर संभाल पाने में भी नाकाम साबित हुई। वजह मतदान से ठीक पहले नितिन अग्रवाल भाजपाई हो गए।
भाजपा के हर प्रत्याशी को जीत के लिए चाहिए थे 37, मिले 39 वोट
भाजपा के सभी आठ अधिकृत प्रत्याशियों को पहले से तय 39-39 वोट मिले। जबकि नवें प्रत्याशी अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर के बीच कांटे का मुकाबला चलता रहा। शुरुआत में ही बसपा के भीमराव अंबेडकर को प्रथम वरीयता के 32 वोट मिल गए।
जबकि भाजपा के अनिल अग्रवाल को पहली वरियता के मात्र 16 वोट मिले थे। हालांकि अम्बेडकर के पास द्वितीय वरीयता का केवल एक वोट था। जबकि भाजपा के अनिल अग्रवाल के पास द्वितीय वरीयता के वोटों की संख्या काफी अधिक थी।
वहीं अन्य प्रत्याशियों के जीत के लिए जरूरी 37 वोट से अधिक वोट भी अंतिम प्रत्याशी के तौर पर अनिल अग्रवाल को ट्रांसफर होते गए। इस तरह भाजपा अपने नौवें प्रत्याशी को भी जिताने में सफल रही। वहीं सपा की अधिकृत प्रत्याशी जया बच्चन को 37 वोटों की ज़रूरत थी जबकि उन्हें कुल 38 वोट मिले। उन्होंने बिना किसी दबाव के जीत हासिल कर लिया। दो विधायकों के वोट को अवैध घोषित कर दिया गया। इस तरह कुल 398 मतों की ही गिनती की गई।